कॉपीराइट क्या होता है? Indian copyright act in Hindi (1957)

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कॉपीराइट का अर्थ है कॉपी करने का राइट| अर्थात ऐसा content जिसको आपने produce किया हो तो उसपे morally और legally आपका अधिकार बनता है| ऐसा content आपकी intellectual property कहलाती है| कॉपीराइट क्या है ये तो आपको पता चल गया|

अब बात करते है कॉपीराइट कानून के बारे में| content की इस चोरी को रोकने के लिए 1957 में एक कानून बनाया गया था| आज हम Indian copyright act in Hindi टॉपिक पर भी बात करेंगे| 

अगर आप एक कंटेंट क्रिएटर, राइटर, म्यूजिशियन, कवि, cinematographer, कोरिओग्राफर, आदि है तब आपको copyright act 1957 के बारे में जरूर जानना चाहिए| ताकि आपकी intellectual property कोई चोरी न सके|

Copyrighted work को केवल owner के द्वारा ही प्रयोग किया जा सकता है| 

Categories जिन पर कॉपीराइट मिल सकता है

2008 में Eastern Book Company vs DB Modak केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी भी चीज पर कॉपीराइट के लिए आपका original thought और creativity होना जरूरी है| ऐसा नहीं है कि अपने अकबर की जीवनी लिख दी और उस पर आपको कॉपीराइट मिल जाये| 

केवल कुछ ही categories हैं जिन पर आपको कॉपीराइट मिल सकता है-

  1. साहित्य कार्य (Literary works) – Books, poems, articles, novels etc. 
  2. संगीत सम्बंधी कार्य (Musical works): musical compositions या songs 
  3. नाटकीय कार्य (Dramatic works): plays, dramas, scripts, screenplay etc.
  4. कलात्मक कार्य (Artistic work): Painting, drawing और sculpture etc.
  5. सिनेमैटोग्राफ फिल्म: video films, movies.
  6. आर्किटेक्चर ब्लूप्रिंट: building design, architecture 
  7. साउंड रिकॉर्डिंग: music, podcast, sounds 
  8. कंप्यूटर प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर: Software या computer program

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भारत में 1911 Imperial copyright act अस्तित्व में आया था| स्वतंत्रता के बाद 1957 में Indian copyright act, 1957 लागू किया गया था| जिसे कॉपीराइट कानून या प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम 1957 भी कहा जाता है|

इस कानून के तहत कॉपीराइट ओनर को कुछ अधिकार दिए गए जाते है| जिससे वह अपनी Intellectual property को चोरी होने से बचा सके|

कॉपीराइट का स्वामित्व और स्वामी के अधिकार

कॉपीराइट अधिनियम, 1957 में, कॉपीराइट ओनर के पास अधिकार हैं जो दूसरों को उसके कार्यों का कुछ तरीकों से उपयोग करने से रोकने के लिए हैं। इस अधिनियम में कॉपीराइट ओनर को दो प्रकार के अधिकार दिए गए हैं:

  • आर्थिक अधिकार;
  • नैतिक अधिकार।

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कॉपीराइट का First owner– इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन, जिस व्यक्ति ने  किसी कार्य का निर्माण किया है, कॉपीराइट का first owner वही होगा|

एक समाचार पत्र मालिक द्वारा अपने रोजगार के दौरान लेखक द्वारा किए गए साहित्यिक, नाटकीय या कलात्मक कार्य के मामले में वह लेखक काम में कॉपीराइट का पहला मालिक होगा।

हालांकि, “contract of service” या apprenticeship के तहत एक लेखक के रोजगार के दौरान किए गए कार्यों के लिए, employer को कॉपीराइट का पहला मालिक माना जाता है| 

कॉपीराइट का असाइनमेंट– कॉपीराइट ओनर न केवल स्वयं उस कार्य को use कर सकता है बल्कि पारस्परिक लाभ के लिए इसे दूसरों के साथ साझा करके भी धन उत्पन्न कर सकता है। यह कॉपीराइट के असाइनमेंट और लाइसेंसिंग के माध्यम से किया जा सकता है।

केवल कॉपीराइट ओनर को ही अपने मौजूदा या भविष्य के कॉपीराइट किए गए कार्य को पूर्ण या आंशिक रूप से असाइन करने का अधिकार है और इस तरह के असाइनमेंट के बाद दूसरा व्यक्ति असाइन किए गए कार्य के कॉपीराइट से संबंधित सभी अधिकारों का हकदार हो जाता है, और उसे उन अधिकारों के संबंध में कॉपीराइट ओनर ही माना जाएगा।

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Assignment agreement का तरीका

धारा 19 के अनुसार, वैध असाइनमेंट के लिए ये शर्तें आवश्यक हैं:

  • यह लिखित और हस्ताक्षर किया हुआ होना चाहिए;
  • इसे सौंपे गए अधिकारों के प्रकार और अवधि या क्षेत्रीय सीमा को निर्दिष्ट करना चाहिए
  • इसमें किसी भी मामले में आवश्यक होने पर देय रॉयल्टी की राशि निर्दिष्ट करनी चाहिए।

यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि समझौते में अवधि का उल्लेख नहीं किया गया है तो इसे पांच वर्ष माना जाएगा और यदि समझौते में क्षेत्रीय सीमा निर्धारित नहीं है, तो इसे पूरे भारत पर लागू माना जाएगा।

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कॉपीराइट की अवधि

कॉपीराइट की अवधि कॉपीराइट ओनर की मृत्यु के 60 साल तक उसके पास होती है| 

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